पुरानी से पुरानी खांसी का रामबाण इलाज: 7 दिनों में जड़ से खत्म करने वाला आयुर्वेदिक घरेलू नुस्खा
आज की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में लोग शारीरिक और मानसिक बीमारियों से घिरे हैं, और बिना सोचे-समझे एलोपैथी पर निर्भर हो जाते हैं। हमारा हेल्थ ब्लॉग 'Healthier Ways of Life' प्राकृतिक, आयुर्वेदिक और स्वर विज्ञान पर आधारित सरल व सस्ते उपायों के ज़रिए आपको स्वस्थ जीवन की दिशा में मार्गदर्शन देता है। समझें जड़ों को और अपनाएँ सच्चे समाधान! नोट: ऊपर बाई ओर 3 लाईन को क्लिक करें, ब्लॉग के features देखें। धन्यवाद..!! गुगल ट्रांसलेट के फीचर्स से विश्व के सभी भाषाओं में देखें
मनुष्य का शरीर पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश — इन पंच तत्वों से निर्मित है। इन तत्वों की समुचित आपूर्ति और इनमें सामंजस्य को जानकर इन्हें जीवन में सम्मिलित करने के प्रयासों को ही पंच तत्वों की साधना कहा जाता है। यहाँ हम इनकी पृथक-पृथक महत्ता की विवेचना करेंगे जिन्हें अपने जीवन में उतारकर बुढ़ापा और बिमारी की रुग्णता को भगाने में खुद को सक्षम कर पाएंगे।
पृथ्वी तत्व जीवन के मूलाधार से जुड़ा स्थूल तत्व है, जिसमें मिट्टी के प्रयोग की प्रधानता है।
नंगे पैर टहलना: प्रातःकाल लाभदायक गैसों के अधिक उत्सर्जन के कारण आधे घंटे नंगे पैर टहलना अत्यंत लाभकारी होता है।
मृत्तिका लेपन: शरीर के दर्द वाले स्थानों पर मिट्टी का लेप लगाने से तुरंत आराम मिलता है।
मिट्टी से मालिश: सप्ताह में एक बार गीली पीली मिट्टी से मसाज कर 10-15 मिनट छोड़कर स्नान करने से त्वचा में प्राकृतिक आभा आती है।
टिप: खुले जख्म पर मिट्टी का प्रयोग न करें।
जल तत्व की महत्ता भोजन के पश्चात प्यास की अनुभूति से स्पष्ट होती है। शरीर का लगभग 60% हिस्सा जल ही है।
शुद्ध जल सेवन: घूंट-घूंट कर जल पीने से लार में उपस्थित पाचक एंजाइम्स शरीर में मिलते हैं, जो पाचन में सहायक होते हैं।
खनिज लवण: सलाद (गाजर, मूली, खीरा, टमाटर, प्याज आदि) के रसों में खनिज लवण भरपूर होते हैं।
टॉक्सिन्स की निकासी: पृथ्वी और जल तत्व शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकालते हैं।
अग्नि तत्व ही शरीर में प्राण का संचालन करता है। इसका बाह्य स्रोत सूर्य है और आंतरिक रूप में यह जठराग्नि के रूप में विद्यमान है।
तेज भूख: यह जीवनी शक्ति का प्रतीक है।
सूर्यस्नान: सूर्योदय से पहले और बाद में सूर्य के समक्ष रहना अत्यंत लाभकारी होता है।
नमक मुक्त भोजन: रविवार को कृतज्ञता स्वरूप एक बार नमक रहित भोजन लेने की परंपरा रक्त विकारों और चर्म रोगों में लाभदायक होती है।
टिप: गर्मी में रात को स्नान करने से शरीर की उष्मा संतुलित रहती है।
वायु तत्व प्राणवायु (ऑक्सीजन) का प्रतीक है और इसके बिना जीवन असंभव है।
सुबह का समय: सुबह 5:30 से 6:30 के बीच ऑक्सीजन की मात्रा अधिक होती है।
प्राणायाम: अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, बटरफ्लाई, कुम्भक आदि प्राणायाम मानसिक और शारीरिक आरोग्यता देते हैं।
पैदल चलना: सुबह आधे घंटे की सैर से शरीर में ताजगी बनी रहती है।
आकाश तत्व पंच तत्वों में सबसे सूक्ष्म होता है और यह मानसिक शक्ति और आत्मिक उन्नति का आधार है।
सद्गुरु का महत्व: जीवन में एक समर्थ सद्गुरु का होना आत्मिक साधना के लिए अनिवार्य है।
गुरु का प्रकाश: सद्गुरु की साधना से आकाश तत्व की अनुभूति होती है जिसे आत्मानंद भी कहा जाता है।
मानवीय मूल्य: सेवा, प्रेम, करुणा, त्याग जैसे गुणों का जागरण इसी तत्व से संभव है।
हमारे ऐसे ही समर्थ सद्गुरु रामाश्रम सत्संग, मथुरा में डैम्पियर नगर में हैं। इस सत्संग की स्थापना पूज्य डॉ. श्री चतुर्भुज सहाय जी ने सन् 1930 में की थी। लाखों लोग इससे आत्मिक लाभ प्राप्त कर चुके हैं।
✍️ विजय कुमार कश्यप