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पुरानी से पुरानी खांसी का रामबाण इलाज: 7 दिनों में जड़ से खत्म करने वाला आयुर्वेदिक घरेलू नुस्खा

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  पुरानी और जिद्दी खांसी के लिए आयुर्वेदिक अमृत: एक अचूक घरेलू नुस्खा बदलते मौसम और प्रदूषण के कारण आजकल खांसी की समस्या आम हो गई है। कई बार दवाइयां लेने के बाद भी खांसी पीछा नहीं छोड़ती। आयुर्वेद में रसोई में मौजूद मसालों को औषधि का दर्जा दिया गया है। आज हम एक ऐसे ही प्रभावी नुस्खे के बारे में जानेंगे जो सूखी और बलगम वाली, दोनों तरह की खांसी को जड़ से खत्म करने की क्षमता रखता है।   आवश्यक सामग्री और उनका वैज्ञानिक महत्व : इस नुस्खे को तैयार करने के लिए आपको निम्नलिखित छह चीजों की आवश्यकता होगी -    1. कसा हुआ अदरक (4 चम्मच): अदरक में 'जिंजरॉल' नामक सक्रिय तत्व होता है जिसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। यह गले की सूजन को कम करता है और संक्रमण से लड़ता है।   2. गुड़ (6 चम्मच): गुड़ फेफड़ों की सफाई करने के लिए जाना जाता है। यह एक 'एक्सपेक्टोरेंट' की तरह काम करता है, जो जमा हुए बलगम को बाहर निकालने में मदद करता है।   3. अजवाइन (1 चम्मच): इसमें 'थायमोल' होता है जो श्वसन मार्ग को साफ करता है और फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाता है।   4. का...

तन, मन और धन – स्वास्थ्य का त्रिकोण


तन, मन और धन – स्वास्थ्य का त्रिकोण
 

तन-मन और धनये तीनों ही मानव जीवन के स्वास्थ्य से जुड़ा एक आवश्यक और बेहद महत्वपूर्ण त्रिकोण हैं, जिसके प्रभाव से अछूता और अनजान कोई भी इंसान नहीं है।

यहाँ हम इसका संक्षिप्त विश्लेषण प्रस्तुत कर रहे हैं

 

तन और मन पर धन का शासन और प्रभाव ऐसा है कि प्रायः सभी को यह स्पष्ट आभास होता है कि यह निर्जीव पदार्थ सजीवों से क्या-क्या खेल नहीं करवा सकता?

 

पैसा सब कुछ नहीं, तो बहुत कुछ है। 


पैसे के लिए इंसान क्या नहीं करता? मनुष्य के तन और मन की सारी क्रियाशीलताएँ पैसा और सिर्फ पैसा कमाने के इर्द-गिर्द ही घूमती रहती हैं।
 
फुर्सत के क्षणों में आराम की इच्छा तो होती है, लेकिन अत्यधिक पैसे कमाने की होड़ में हर तबके में ओवरटाइम कार्य करने की प्रवृत्ति ज़ोर पकड़ने लगी है।
 
जब हम शारीरिक गतिविधियों को पूरी तरह से निष्क्रिय कर देते हैं, तो इसका भी स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।
पाचन क्रिया धीरे-धीरे शिथिल हो जाती है, रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है।
इसका गंभीर प्रभाव कोविड-19 के समय में हम सभी अनुभव कर चुके हैं।
 
स्वच्छंद विचरण करने वाले पंछी को जब पिंजरे में बंद कर दिया जाए — तो जो हालात होते हैं, वही हालात उस समय लोगों के थे।
सभी जानते हैं कि उस समय जितने लोग कोरोना से संक्रमित होकर नहीं मरे, उससे कहीं ज़्यादा लोग शारीरिक गतिविधियाँ कम होने और मानसिक घुटन के कारण चल बसे।

निष्कर्ष : 

 

यदि हमें स्वस्थ जीवन चाहिए, तो तन और मन के साथ-साथ धन से भी मजबूत होना पड़ेगा।
हालाँकि तन और मन के कार्य से थकान स्वाभाविक है, लेकिन अत्यधिक धन कमाने की हवस में इंसान व्यसनों और गंदी आदतों का शिकार हो जाता है। इनसे बचे रहकर तन-मन-धन से मजबूत होकर सामाजिक प्रतिष्ठा और ख्याति प्राप्त कर सभ्य जीवन का आनन्द ले सकते हैं। वैसे आनन्द तो आत्मा का विषय क्षेत्र के अंतर्गत है किन्तु इसकी प्राप्ति के लिए भी तन-मन-धन से सामर्थ्यवान होना अति आवश्यक है। 

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इसलिए, इन तीनों के बीच संतुलन बनाकर चलना ही सच्ची बुद्धिमानी है।

✍️ विजय कुमार कश्यप

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