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पुरानी से पुरानी खांसी का रामबाण इलाज: 7 दिनों में जड़ से खत्म करने वाला आयुर्वेदिक घरेलू नुस्खा

 

पुरानी और जिद्दी खांसी के लिए आयुर्वेदिक अमृत: एक अचूक घरेलू नुस्खा

बदलते मौसम और प्रदूषण के कारण आजकल खांसी की समस्या आम हो गई है। कई बार दवाइयां लेने के बाद भी खांसी पीछा नहीं छोड़ती। आयुर्वेद में रसोई में मौजूद मसालों को औषधि का दर्जा दिया गया है। आज हम एक ऐसे ही प्रभावी नुस्खे के बारे में जानेंगे जो सूखी और बलगम वाली, दोनों तरह की खांसी को जड़ से खत्म करने की क्षमता रखता है।

 आवश्यक सामग्री और उनका वैज्ञानिक महत्व:


इस नुस्खे को तैयार करने के लिए आपको निम्नलिखित छह चीजों की आवश्यकता होगी - 



 1. कसा हुआ अदरक (4 चम्मच):

अदरक में 'जिंजरॉल' नामक सक्रिय तत्व होता है जिसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। यह गले की सूजन को कम करता है और संक्रमण से लड़ता है।


 

2. गुड़ (6 चम्मच):

गुड़ फेफड़ों की सफाई करने के लिए जाना जाता है। यह एक 'एक्सपेक्टोरेंट' की तरह काम करता है, जो जमा हुए बलगम को बाहर निकालने में मदद करता है।


 

3. अजवाइन (1 चम्मच):

इसमें 'थायमोल' होता है जो श्वसन मार्ग को साफ करता है और फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाता है।


 

4. काली मिर्च (1/4 चम्मच):

काली मिर्च में मौजूद 'पाइपरिन' कफ को छाती से उखाड़ने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक है।


 

5. हरी इलायची (5-6 दाने):

इलायची की तासीर कफ को संतुलित करने वाली होती है और यह फेफड़ों में रक्त के संचार को सुचारू बनाती है।


 

6. काला नमक (1/4 चम्मच):

यह गले के मार्ग को साफ करता है और बलगम को पतला करने में मदद करता है।


 नुस्खा तैयार करने की विधि:

इस आयुर्वेदिक औषधि को बनाने की प्रक्रिया बहुत सरल है:


 मिश्रण तैयार करना:

सबसे पहले अदरक, अजवाइन, काली मिर्च, हरी इलायची और काला नमक (पहली पांच सामग्री) को मिक्सर में डालकर अच्छी तरह पीस लें।


 गुड़ को पिघलाना:

अब एक लोहे की कड़ाही लें। लोहे की कड़ाही का उपयोग करने से औषधि में आयरन के तत्व भी शामिल हो जाते हैं। इसमें गुड़ डालें और बिल्कुल धीमी आंच पर इसे पिघलने दें।


 औषधि का संयोजन:

जैसे ही गुड़ पिघल जाए, इसमें पहले से तैयार किया गया पिसा हुआ मिश्रण डाल दें।


 पकाना:

धीमी आंच पर इसे केवल 2 मिनट तक चलाते हुए मिलाएं ताकि सभी मसाले और गुड़ एकसार हो जाएं।


 

संग्रहण:

आंच बंद कर दें और मिश्रण को ठंडा होने दें। ठंडा होने के बाद इसे कांच के एक साफ एयरटाइट डिब्बे में भरकर सुरक्षित रख लें।

सेवन की विधि और प्रभाव:


इस मिश्रण का सेवन बहुत ही सावधानी और नियम के साथ करना चाहिए:


 मात्रा: आधा-आधा चम्मच सुबह और शाम।


 अनुपान:

इसे हमेशा गुनगुने या गर्म पानी के साथ ही लें।


 परिणाम:

नियमित सेवन से 3 दिनों के भीतर आपको खांसी की तीव्रता में कमी महसूस होगी। 7 दिनों के निरंतर प्रयोग से सामान्य खांसी पूरी तरह ठीक हो सकती है।


 पुराना कफ:

 यदि खांसी बहुत पुरानी है या उसका वेग अधिक है, तो आप इस नुस्खे को दोबारा बनाकर लगातार एक महीने तक ले सकते हैं। यह पुरानी से पुरानी बलगम वाली या सूखी खांसी को जड़ से समाप्त करने में सक्षम है।

सावधानी :

10 साल से छोटे बच्चों को इस नुस्खे को न दें। 10 से 16 आयु वालों को आधी खुराकें फायदेमन्द रहती है 

  निष्कर्ष:


आयुर्वेद के सिद्धांतों के अनुसार, खांसी शरीर में वात और कफ दोष के असंतुलन से उत्पन्न होती है। इस नुस्खे में उपयोग की गई सभी सामग्रियां तासीर में गर्म और कफ नाशक हैं। गुड़ और अदरक का मेल गले को तर रखता है, जिससे सूखी खांसी में होने वाली जलन शांत होती है, वहीं काली मिर्च और अजवाइन बलगम को बाहर निकालते हैं।


  सलाह यह है कि इस औषधि के सेवन के दौरान ठंडी तासीर वाली चीजों, जैसे फ्रिज का पानी, दही और आइसक्रीम से परहेज करें। यह नुस्खा न केवल खांसी का इलाज करता है, बल्कि आपके श्वसन तंत्र को भीतर से मजबूती भी प्रदान करता है। संयम और नियम के साथ किया गया इसका प्रयोग किसी भी अंग्रेजी कफ सिरप से अधिक प्रभावशाली सिद्ध होता है।



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लेखक : विजय कुमार कश्यप 


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